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नीम का महत्व | Neem In Hindi

Neem In Hindi
Neem In Hindi

भारत के ऋषीमुनियोने प्राचीन काल में तपश्चर्या के द्वारा जो शोध (Research) लगाये थे उसका लाभ पृथ्वी के सभी मनुष्योंको आज भी मिल रहा है | Neem In Hindi इस लेख में हम ऋषी मुनियोन्द्वारा आयुर्वेद कि जो रचना हुई उसमे नीम के बारेमे बहुत जानकारी मिलती है |

नीम  का महत्व क्या है ? धार्मिक दृष्टिसे नीम  का महत्त्व क्या है ? नीम  के लाभ क्या है ? आदी के बारेमे इस लेख में हम जानकारी लेंगे |

नीम भारतीय वृक्ष है | आयुर्वेद में नीम की बड़ी महिमा गायी है | ऐसा माना जाता है की रोजाना नीम के पेड़ के निचे कुछ देर बैठनेसे कई रोग पास भी नहीं आते है |

नीम का धार्मिक महत्त्व – Neem in Hindi

भारतीय परंपरा के अनुसार हिंदुओंके वर्ष की शुरुवात चैत्र शुद्ध प्रतिपदा इससे होती है | मराठी में इसे गुढी पाडवा कहेते है | गुढी उभारते समय नीम के डाली का उपयोग करते है | उस समय जो प्रसाद करते है उसमे नीम के पत्ते, गूड इसका उपयोग होता है |

ऋषीयों का निसर्ग का ज्ञान बहुत विशाल था| चैत्र मास से गर्मियोंका मौसम शुरू होता है | और इसकी वजह से कुछ बिमारियोंका हमें सामना करना पड़ता है |

नीम में औषधि तत्व है ये ऋषीयों ने हमें बताया है और ऋषीयों के कहने के अनुसार नीम जब हम इस महीने सेवन करते है तो ये बिमारियोंमें हमें लाभ होता है | नीम सेवन करने से हमारे शरिर में जो उष्णता (heat) है वों कम हो जाती है |  इसीलिए प्रसाद में नीम का उपयोग करने के लिये कहा है |

नीम के पेड़ की जानकारी – Neem tree

Neem In Hindi
Neem in Hindi

मूलतः ये भारतीय वृक्ष होते हुए भी आज दुनिया के अलग अलग जगह पहुँच गया है | गए लगभग डेढ़ सौ वर्षों में यह वृक्ष भारत की सीमा को लांघ कर थाईलैंड, इंडोनेशिया,  श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, दक्षिण एवं मध्य अमेरिका ऐसे देशोमे जा पंहुचा है |

नीम को अन्य भाषा में क्या कहेते है

संस्कृत   :- निम्ब / तिक्तक /अरिष्ट /परिभद्र /पिचुमर्द

मराठी    :- कडूलिंब

इंलिश   :- Indian Lilak , Neam , Margosa Tree

कन्नड़   :- बेवु

गुजराथी  :- लिम्बड़ो

तेलगू    :- निम्बमु

बंगाली   :- निमगाछ

तमिल   : कड्डपगै

मलयालम :- वेप्पू / अतितिक्त

पेड़ की ऊंचाई : नीम एक तेजी से बढ़नेवाला पेड़ है | यह वृक्ष लगभग ५०-६५ फूट (50 – 65 ft)             ऊंचाई तक पहुच सकता है | इसकी शाखाओंका प्रसार बहुत होता है | इसकी छाल कठोर होती है |

फूल : इस वृक्ष के फूल सफ़ेद और सुगन्धित होते है |

फल : इसका फल गोलाकार से अंडाकार होता है और इसे निम्बोली कहते है |

नीम के फायदे – Neem Benefits

नीम  का वृक्ष भारतीय मिटटी के लिये बहुतही अनुकूल है | इसका स्वाद कडवा होता है लेकिन इसके फायदे अनेक है |

नीम के पत्ते के रस में बैक्टीरिया और वायरस से लढने की क्षमता होती है | नीम के पेड़ का हर हिस्सा उपयोगी है | जैसे की नीम का पत्ता ,नीम का फल , नीम के पेड़ की छाल या नीम का जड़ हर हिस्सा लाभदायक ही है |

सच ही है जिस घर में नीम का पेड़ है वहा बहुत बीमारियोंका इलाज आरामसे मिल सकता है |

  • नीम के पत्ते और टहनियों को जलाने से मच्छर ख़त्म हो जाते है |
  • नीम से कीड़े मरते है इसीलिए नीम के पत्तोंको कपड़ो में और अनाज में रखते है |
  • मुह के छाले , खुजली , मधुमेह , हृदयरोग इत्यादी बिमारीमे नीम लाभदायक होता है |
  • नीम की छाल का लेप त्वचा रोगों में सहायक होता है |
  • नीम के पतली डाली का ऊपयोग दातुन के रूप में करते है | इससे दात और मसूड़े स्वस्थ रहेते है |
  • नीम की पत्तिया चबाने से रक्त शुद्ध होता है और त्वचा विकार रहित होती है |
  • नीम की पत्तियों को पानी में उबाल उस पानी से स्नान करने से त्वचा विकार में लाभदायक होता है |
  • प्रतिदिन नीम का रस पिने से मधुमेह जैसी बिमारी में लाभ होता है | अपने डॉक्टर की सलाह लेकर आप इसका सेवन करे
  • नीम के द्वारा बनाया गया लेप बालोमें लगानेसे बल कम झडते है और बाल स्वस्थ रहेते है |

नीम के ऐसे बहुत सारे फायदे है लेकिन ये करते समय अपने डोक्टोरोंसे  अवश्य सलाह ले |

नीम दातुन के लाभ – Neem Datun

आज जादातर लोग टूथपेस्ट और ब्रश का उपयोग करते है | टूथपेस्ट में केमिकल होते है | इससे दात तो साफ होते है लेकिन मसूड़ों को तकलीफ होती है |

जब दातों की सफाई के लिये टूथपेस्ट का शोध नहीं हुआ था उस समय तक लोग जादातर दातुन का ही इस्तेमाल करते थे |

नीम के पतली टहनी को तोड़कर उससे दातुन बनाया जाता है | उसके बाद उस टहनी को दातों से कुचकर उससे दातों की सफाई की जाती है | इससे दातों की सफाई तो हो जाती है उसके साथ साथ दात और मसूड़े मजबूत हो जाते है |

इतनाही नहीं साथ साथ मुह के तमाम बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते है | दातुन के प्रयोग से कोनसी भी समस्या उत्पन्न नहीं होती |

दातुन के प्रयोग से सिर्फ़ दातों को लाभ होता है ऐसा नहीं है बल्कि दातुन करते समय जो लार बनती है उसको थूकने की बजाय निगल ले तो पेट की भी कई समस्या दूर हो सकती है |

नीम एक बैक्टीरिया विरोधी , औषधि गुणों से सम्पन्न पेड़ है | इससे बना दातुन दातों के साथ साथ पाचन क्रिया में भी लाभदायी होता है | इसके आलावा चेहरे पर भी निखार आता है | नीम का दातुन नेचुरल माउथफ्रेशनर का भी काम करता है | ये दातुन करने से मुह से दुर्गन्ध नहीं आती |

वास्तुशुद्धी हेतु नीम का उपयोग – Neem In Hindi

वास्तुशुद्धि के लिये भी नीम के पत्तोंका उपयोग किया जाता है | आइये इसके बारेमे जानकारी लेते है |

साहित्य : सुखा गोबर, गायका घी, कर्पुर, नीम के पत्ते , कटोरे के आकार का बड़ा पात्र , चिमटा

सूखे गोबर के उपर घी और कर्पुर जलाकर उसके साथ नीमके पत्ते जलाकर उसका धुआ किया जाता है | घर में सभी कोने में उस धुए को फैलाकर शुद्धी की जाती है | ये शुद्धी करते समय अपने इष्ट देवता का जाप करना चाहिए |

ये करने से वास्तु के भीतर जो रज तम होता है उसका प्रभाव कम  हो जाता  है | सप्ताह में एक बार ऐसी शुद्धी करनी चाहिए |

आज Neem In Hindi इस लेख की ये  जानकारी  केवल और केवल ऋषी मुनियोन्की कि कृपासे हमे आयुर्वेद्से मिलती है | ऋषीयोंका पृथ्वी के मानवजाती पर बडा उपकार है | इसीलिये हम सबको उनकी चरणो के प्रती कृताग्यता व्यक्त करनी चाहिए |

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