How To Get Peace Of Mind In Hindi

How To Get Peace Of Mind In Hindi – मन की शान्ति कैसे प्राप्त करे

बहुतों को ऐसा लगता है की मन हमारे शरिर के अन्दर होता है लेकिन असल में देखा जाये तो मन हमारे शरिर के बाहर रहेता है |  हमारे मन में पलभर में हजारों विचार आते जाते रहते है | कुछ विचार अच्छे होते है | तो कुछ विचार बुरे होते है | इन सब विचारोंका हमारे शरिर पर भी बुरा या अच्छा असर होता है | How To Get Peace Of Mind In Hindi इस लेख में मन अशांत क्यों रहता है ये देखेंगे

हर व्यक्ति ये चाहता है की हमारा मन  सदैव शांत रहे, मन की शान्ति हमेश बनी रहे | अच्छा विचार करता रहे लेकिन मन एक ऐसी चीज है जिसे अपने काबू में रखना बड़ाही मुश्किल काम है |  ये काम बहोत कठिन  जरुर है लेकिन नामुमकिन नहीं है | हिंदु संतोंके कहने के अनुसार भगवान के नाम का जाप करने से मन अपने काबू में रह सकता है |

How To Get Peace Of Mind In Hindi
मन की शान्ति

मनकी गति बहोतही वेगवान होती है | अगर हम अभी अपने घरमे बैठकर किसीसे बाते कर रहे होते है तभी पलभरमें हमारा मन किसी दुसरे देश में जाकर आता है | कभी हमारे मन में भूतकालके विचार आते है तो कभी भविष्यकी चिंता करता है | इस प्रकारसे मन में कुछ ना कुछ विचार आते रहते है |   इसलिये मन को बहोत चंचल कहते है | और इन्ही विचारोंके कारण हमें शान्ति नहीं मिलती | वैसे आजकल देखा जाये तो सबको मन की शान्ति की तलाश रहती है और इस शान्ति को  हम इधर उधर खोजते रहते है |

आज कल तो हर जगह कभी भी देखो तो तणाव बहोत ही बढ़ गया है इससे चिडचिडापन, निराश होना , नकारात्मक विचार, हिंसा करना ये सब चीजे बढ़ गयी है | छोटी छोटी बातोंसे भी व्यक्ति गुस्से में आ जाता है | आइये कुछ ऐसेही प्रसंग देखते है |

  • आज विजय को ऑफिस में जा कर एक प्रेसेंटेशन देना था | उसने सोचा की सुबह ऑफिस में थोड़ा जल्दी पहुंचना चाहिये | तो सुबह मुझे जल्दी उठना चाहिये यैसा विचार करते वों सो गया | लेकिन सुबह जब वों जाग गया वों उसे देर हो गयी थी | इस बात पे वों खुदपर ही गुस्सा हो गया और गुस्सेसेही ऑफिस जाने के लिये तैय्यार होने लगा तभी उसका हाथ टेबल पर रखे पानी को लग गया और पानी गिर गया वही विजयकी ऑफीस के कागजात रखे थे तो वों भी गिले हो गये इससे उसका गुस्सा और भी बढ़ गया | फिर उसने सोचाकी बस से जाने में देर हो जाएगी इसलिये वों ऑटो से जाने लगा लेकिन थोडा ही आगे जाने के बाद traffic लग गया और उसे और देर हो गयी इन सबका उसे बहोत टेंशन आ गया और उसका बी.पी. बढ़ गया |

 

  • समीरने अपने दोस्त को १० बजे बुलाया था | लेकीन ११ बज गये फिरभी वों नहीं आया इसलिये उसे गुस्सा आ गया |

 

  • राजु की माँने बिन्सकी सब्जी बनायीं थी जो राजूको बिलकुलही पसंद नहीं थी | जब वों खाना खाने बैठ गया तो उसने देखा की बिन्स की सब्जी है तो वों खाना न खाते ही चला गया इससे उसकी माँ भी नाराज हो गयी |

 

ऐसी कई प्रसंग हम अपने आसपास हररोज देखते है इन छोटी छोटी बातोंसे भी हमारा मन अशांत हो जाता है | हमे टेंशन आता है | ये टेंशन तानतनाव जादा बढनेसे ब्लडप्रेशर, हार्टअटैक जैसी बीमारिया भी हो सकती है |

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इन सब से बचने के लिये हमे अपने मनको शांत, प्रसन्न रहना चाहिये | इसके लिये हमे अलग अलग तरीकेसे अपने मनको स्थिर रखना चाहिये|

जैसे पहले प्रसंगमे हमने देखा की विजयको सुबह नींद खुलनेमे देर हो गयी और आगे आगे उसका गुस्सा बढ़ता गया | इसलिये अगर वों रातको सोते समय अलार्म लगाकर सोया होता और कुछ तैयारी करके सोता तो ये मुसीबत नहीं आती | फ़िरभी अगर उसको उठने में देर हो गयी तो २ मिनिट रुककर क्या क्या करना चाहिए ये ठन्डे दिमागसे सोचता और वैसे करता तो भी समय पर ऑफिस में पहुँच सकता था |

दुसरे प्रसंग में भी अगर समीर अपने दोस्त को फ़ोन कर पूछता तो भी उसको देर होने की वजह पता चल जाती और वों गुस्सा होनेसे रुक जाता था |

तीसरे प्रसंग में राजू अपनी माँ को अगर अछे शब्दों में कहता तो माँ भी कुछ दूसरा बनाकर दे सकती थी इससे राजू को खाना मिलता और माँ भी अपने आपको नहीं कोसती

ऐसेही  हम शांत कैसे रह सकते है और क्या क्या तरीके है ये हम अगले लेख में पढ़ेगे|

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