यह कहानी है एक बहुत ही साहसी महिला की जिनका नाम है बछेंद्री पाल |  First  Indian Woman Mountaineers Who Climbed Mount Everest यह भारत की पहली पर्वतारोही है जिन्होंने पहली बार माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई को छुआ है  | माउंट एवरेस्ट पर इन से पहले दुनिया भर से सिर्फ 4 महीला  चढ़ चुके हैं |  हम सब को इनकी कामयाबी पर गर्व है | और हम सब को इनकी कहानी बहुत प्रेरणादाई है | आइए आगे देखते हैं बचपन से इनको कैसा संघर्ष करना पड़ा और उन्होंने कामयाबी कैसे हासिल की |

बछेंद्री पाल इनका जन्म 24 मई 1954 को हुआ | उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले के एक गांव नाकुरी  में इनका जन्म हुआ | इनका जन्म  एक खेतिहर परिवार में हुआ | इनकी मां का नाम हंसादेवी और पिता का नाम किशनसिंह पाल ऐसा था | इनके पिता बॉर्डर पर व्यापार करते थे |

बचपन में वह अपने गांव के स्कूल में ही जाती थी लेकिन वह जब 14 साल की हो गई तब अन्य लड़कियों की तरह उन्हें भी स्कूल छोड़ने को कहा गया |  लेकिन यह एक होनहार लड़की थी जिन्होंने घर में भी मन लगाकर पढ़ाई करना शुरू रखा तब घर वालों को भी उनकी पढ़ाई की लगन का एहसास हो गया और उन्होंने बछेंद्री को स्कूल की शिक्षा पूरी करने की अनुमति प्रदान कर दी | तब स्कूल का खर्चा उठाने के लिए बछेंद्री कपड़े सीने का काम कर पैसे कमाती थी|

पढ़ाई

  • बछेंद्री की सफलता और लगन देखकर उनके स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने उनके परिवार से बछेंद्री को आगे की कॉलेज शिक्षा जारी रखने की सलाह दी उनके अनुसार उन्होंने B.A. की शिक्षा पूरी की | तब वह गांव की BA पास करने वाली पहली लड़की थी |  B.A. करने के पश्चात संस्कृत लेकर उन्होंने M.A भी किया | साथ ही वह अन्य प्रतियोगिता में भी भाग लेती थी  |
  •  कॉलेज में भीबछेंद्री ने  राइफल शूटिंग में भाग लिया और अन्य लड़को लड़कियों को भी हरा दिया |
  •  लेकिन दुर्भाग्य से इतनी सफलता मिलने के बाद भी उनको अच्छी सी नौकरी नहीं मिली | जो रोजगार मिला था वह अस्थाई और जूनियर       स्तर का था | और वेतन भी बहुत कम मिलता था | इससे बछेंद्री को निराशा हुई फिर उन्होंने नौकरी करने के बजाए  नेहरू इंस्टीट्यूट       ऑफ माउंटेनियरिंग कोर्स के लिए आवेदन भर दिया |
  •   बछेंद्री जब 12 साल की थी तब उन्हें पर्वतारोहण का पहला मौका मिला था | तब उन्होंने अपने स्कूल के सहपाठियों के साथ 400 मीटर की    चढ़ाई की थी |

अभियान

  • 1982 में एडवांस कैंप के तौर पर बचेंद्री ने गंगोत्री और  स     सदूगैराकी चढ़ाई को पूरा किया | इस कैंप में बचेंद्री के ब्रिगेडियर अनंत सिंह ने बतौर इंस्ट्रक्टर पहली नौकरी दी |
  • पर्वतारोही का पेशा अपनाने की वजह से उन्हें परिवार और रिश्तेदारों के विरोध का सामना भी करना पड़ा | लेकिन वह अपने निश्चय पर अटल रही |
  • 1984 में भारत का चौथा एवरेस्ट अभियान शुरू हुआ | इस अभियान में बछेंद्री समेत 7 महिला और 11 पुरुष टीम में शामिल थे | इस टीम के द्वारा 23 मई 1984 को दोपहर 1:7 मिनिट पर भारत का झंडा लहराया गया और उन्होंने एक बड़ी कामयाबी हासिल की | यह कोई साधारण काम नहीं था | रास्ते में उनको बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा |
  • जब उन्होंने तिरंगा लहराया तब वह  29028 फुट की ऊंचाई पर थे | इसके साथ ही यह भारत की पहली और दुनिया की पांचवी महिला पर्वतारोही बन गई | इस कामयाबी के कुछ समय बाद ही उन्होंने इस शिखर पर महिलाओं की एक टीम के अभियान का सफल नेतृत्व किया |
  • 1994 में गंगा नदी के हरिद्वार से कोलकाता तक 2500 किलोमीटर लंबे नौका अभियान का भी नेतृत्व किया |
  •  हिमालय की गलियारे में भूटान नेपाल और सियाचिन से होते हुए काराकोरम पर्वत श्रंखला पर समाप्त होने वाला अभियान भी उन्होंने पूरा किया | जिसकी लंबाई 4000 किलोमीटर इतनी थी|  जिससे इस दुर्गम क्षेत्र में प्रथम महिला अभियान का प्रयास कहा जाता है | आज तक इन को बहुत सारे अवार्ड भी मिले हैं |

    First  Indian Woman Mountaineers Who Climbed Mount Everest
    Bachendri Pal

सम्मान

  • 1990 में गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड
  • 1985  कोलकाता स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट एसोसिएशन पुरस्कार
  • 1985   पद्मश्री पुरस्कार
  • 1986  कोलकाता लेडीस स्टडी ग्रुप अवार्ड
  • 1994   नेशनल एडवेंचर अवार्ड
  • 1995  उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यश भारती पुरस्कार
  • 1997   लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड
  • 2014   मध्य प्रदेश सरकार से पहला वीरांगना लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय सम्मान | ऐसे बहुत सारे इनाम इनको मिले हैं |
  • इसके साथ ही उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी है जिसका नाम है एवरेस्ट माय जर्नी टू द टॉप
  • फिलहाल हो वर्तमान में इस्पात  कंपनी टाटा स्टील में कार्यरत है

अभी हमने एक बहुत ही कामयाब महिला की कहानी देखी इससे हमें बहुत प्रेरणा मिलती है |

ऐसीही प्रेरणादायी कहानी अवनी चतुर्वेदी की है वों भी आप जरुर पढ़े |