Success Story Of Pepsico CEO Indra Nooyi in Hindi

Success Story Of Pepsico CEO Indra Nooyi in Hindi
Indra Nooyi

पेप्सिको की सीईओ इंद्रा नूयी की सफलता की कहानी

Success Story Of Pepsico CEO Indra Nooyi in Hindi

 

  आज हम आपके लिये एक प्रेरणादायी कहानी लेके आए है | ये कहानी उस महिला कि है जिन्होने अपने करीयर मे बहूत हि उच्च स्थान प्राप्त किया है | जिनका नाम है पेप्सिको कंपनी की सीईओ इंद्र नुई | 

इंद्रा जब छोटीसी थी तब उसको अगर किसीने पूछा कि बडी होकर तुम कौन बनोगी तो ये बोलती थी कि मूझे बहुत बडा बनना है | उसका जबाब सुनने के बाद उसकी मां उसे बोलती थी कि बेटा तुम्हारा सपना कोई भी हो लेकिन उसे पाने के लिये उसका पीछा करना चाहिये | उम्रके कौनसे भी मोड पर ये तुम हासिल कर सकती हो |

मां का ये कहना उसने मान लिया और ओ अपने सपनों का पीछा करने लगी और उसका एक एक सपना पुरा होने लगा |

इंद्रा नूयी इनका जन्म २५ अक्टूबर १९५५ को मद्रास मे एक मध्यम वर्ग जैसे घर मे हुआ था | बचपन मे इनकी मा हमेशा इंद्रा और उनकी बेहेन चंद्रिका इनको यह सवाल करती थी कि आप बडे होके क्या बनेंगे | जिसका जवाब अच्छा लगता था उनको इनाम भी देती थी | वह हमेशा केह्ती थी अगर कुछ भी हो जाये लेकिन आपको ये सपना पुरा हि करना है | हो सकता है इसके लिये ज्यादा समय लगेगा लेकिन इसके लिये आपको बहुत कष्ट झेलना पडेगा और प्रामाणिकतासे बहुत मेहनत करनी पडेगी | मां का ये बार बार कहना उनके मन पर बैठ गया और वो बडी लगन से और मेहनत से काम करने लगी

इंद्रा ने मद्रास ख्रिश्चन कॉलेज से सायन्स कि पदवी प्राप्त कर ली | फिर उन्होन्हे कोलकाता के IIM मे management किया | उसके बाद इन्होन्हे अन्य कम्प्नीयो मे भी जॉब किया | उस समय उनको ऐसा मेहसूस हुआ अगर हमे अपना करीयर बनाना है तो हमे अपने अंदर के गुणोंको लोगोंके सामने लाना होगा | फिर वो और भी मेहनत करने लगी | बिझनेसकी और अन्य बातें सिखनें के लीयें उन्होनें अमरिका में जाकर master of public mangement करने का निश्चय किया उन्होने

येल स्कूल ऑफ मॅनेज्मेंट में जाने के लिये प्रयास किया उनके मार्क्स अच्छे थे हि तो उनको झब ऍडमिशन तो मिल गयी लेकिन फिज भरने के लिये पैसें नही थे तो उन्होने एक रिसेप्शनिस्ट कि जगह काम करना शुरू किया | दिनभर वो पढाई करती थी और रात को नोकरी करते करते उन्होने  अपनी करियर कि शुरुवात कि | अमरिका मे पढाई पूरी करने के बाद उन्होने बोस्टन कन्सल्टंन्सी मे  करियर करना शुरू किया | लेकिन १९६८ में उनके कार का ऍसक अॅक्सिडेंट हो गया और इंद्रा को ये नौकरी छोडनी पडी | कुछ दिनोकें बाद इंद्राने कार्पोरेट stratajiमें करीयर करने का निश्चय किया | इन्होने एबीबी मोटोरोला जैसे कंपनीमें भी कुछ समय काम किया | फिर उनको १९९४ मे पेप्सिको  कंपनीसे ऑफर आया | बस्स और क्या था | उन्होने बडी लगनसे काम करना शुरू किया | और उसका फलभी उन्हे अच्छेसे मिलने लगा | पेप्सिको जैसे बडी कम्पनी को अच्छेसे establish करने में इनका बहुत बडा सहभाग था |

इनकी मेहनत, बडा सहभाग और  अच्छा काम देखकर २००६ में पेप्सिको(Pepsico) कंपनी के  चेअरमन और CEO मि.रेनमुंड इन्होने खूद रिटायरमेंट लेकर इंद्रा को चेअरमन बनाने कि घोषणा की और इंद्राजी भी ये सब जिम्मेदारी अच्छी तरहसे निभा रही हें |

आज इंद्राजी पेप्सिको (Pepsico) अॅन्ड बेव्हरेज कि जिम्मेदारी जागतिक स्तरपर देख रही हें

अमरिका के अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प इनके प्रशासनमे शामिल होनेवाली वो दूसरी भारतीय महिला हें|

इंद्राजीका कार्य और गून देखकर भारत सरकारने २००७ मे “पद्मभूषण” ये पुरस्कार देके उनका सम्मान किया हें | अमरिकामे रहने के बावजूतभी उन्हें भारतीय देश कि संस्कृती भी याद हें |

इंद्राजीके पती श्री. राजकुमार नूयी इनका भी अच्छासा सपोर्ट उनको हें | ये सब करते करते आज वो icc कि संचालक पद के लिये उनकी नियुक्ती हो गयी हे|

एक मध्यम वर्ग के घर जन्म लेकर आज बडे ही उच्च स्थान पर पहुंची हुई इंद्राजी कि कहानी हमें बडी हि प्रेरणादायक हे|

ये थी पेप्सिको की सीईओ इंद्रा नूयी की सफलता की कहानी  Success Story Of Pepsico CEO Indra Nooyi in Hindi