ANANDIBAI JOSHI FIRST WOMEN DOCTOR IN INDIA

ANANDIBAI JOSHI FIRST WOMEN DOCTOR IN INDIA

आनंदीबाई जोशी भारत की पहली महिला डॉक्टर  | ANANDIBAI JOSHI FIRST WOMEN DOCTOR IN INDIA

 

नमस्कार दोस्तों , आज हम फिर से आपके लिए एक प्रेरणा देने वाली कहानी लेकर आए हैं | यह कहानी एक ऐसी महिला की है  जो भारत की पहली महिला डॉक्टर बनी थी  | आनंदीबाई जोशी भारत की पहली महिला डॉक्टर -ANANDIBAI JOSHI FIRST WOMEN DOCTOR IN INDIA  इस लेखमें हम देखेंगे डॉक्टर आनंदीबाई गोपालराव जोशी  की कहानी |

यह एक ऐसी महिला है जिनका नाम आज भी  बहुत   सम्मान के साथ लिया जाता है | यह ऐसे समय में डॉक्टर  बन गई है जब महिलाओं का सीखने का प्रमाण बहुत ही कम था | आजकल ज्यादातर   बेटी और  औरतें आसानी से  विद्यालय या कॉलेज में जाती है | यही नहीं बल्कि  दूसरे देश में  जाना भी आजकल कोई बड़ी बात नहीं  रही |  लेकिन उस जमाने में  यानी कि 1863 मैं यह सोचना  भी बहुत दूर की बात थी |

Biography of AnandiBai Joshi IN Hindi

बचपन 

डॉ आनंदीबाई  गोपाल राव जोशी इनका जन्म 31 मार्च 1865 पुणे में हुआ था |  बचपन में  उनका नाम  यमुना था  | यह पुराने कल्याण शहर में पारनाका परिसर में रहती थी | इनके पिता जी का नाम गणपतराव जोशी ऐसे था |

 विवाह

आजकल तो  लड़कियां पढ़ी लिखी होती है और उनकी शादी भी ज्यादातर उनकी पसंद के लड़के से ही होती है |  लेकिन उस वक्त छोटी सी उम्र में ही लड़कियों की शादी होती थी और उनका पति भी उम्र में  बहुत   बड़े होते  थे | वैसे ही यमुना की   9  वे साल की उम्र में ही शादी हो गई |   वह यमुना की उम्र से लगभग 20 साल बड़े थे |   उनके पति का नाम  गोपाल राव जोशी ऐसे था | शादी के बाद यमुना का नाम आनंदीबाई   रख दिया गया  उसके उम्र के 14 साल में ही उसने एक बेटे को जन्म दे दिया | लेकिन  दुर्भाग्य से वह 10 दिन ही जीवित रहा | उस समय ज्यादातर वैद्यकीय सुविधा नहीं थी | और समय पर अच्छी दवा एवं अन्य सुविधा ना मिलने के कारण आनंदीबाई को अपने बेटे को  खो देना पड़ा | उनके मन को इसकी बहुत गहरी चोट पहुंच गई | लेकिन वह एक बहुत ही   हिम्मत वाली महिला थी जो ऐसे कठिन परिस्थिति में भी रोते हुए नहीं बैठ गई बल्कि उन्होंने खुद डॉक्टर बनने का निर्णय  लिया | जिससे वह अन्य लोगों पर उपचार कर सकें इसी कारण व अन्य लोगों की मदद भी कर सकती थी |

 

 पढ़ाई

इसी दौरान उनके पति के भी यह ध्यान में आया था कि इनको पढ़ाई में बहुत रुचि है | तो डॉक्टर बनने के आनंदीबाई के निर्णय को उनके पति ने भी पूरा सहयोग दिया | इसी निर्णय को आगे ले जाने के लिए गोपाल राव ने अमेरिका को पत्र  भेज दिए | लेकिन वहां प्रवेश लेने के लिए  ख्रिस्ती धर्म का स्वीकार करने की शर्त रखी गई जो उन दोनों को कभी भी   मान्य नहीं थी | लेकिन ऐसी छोटी-छोटी मुसीबतसे वह अपने इरादों से हटने वाले नहीं थे | उन्होंने अपना प्रयास नहीं छोड़ा | और इसका फल उनको मिल गया | वह जैसा चाहते थे वैसे ही हो गया | अमेरिका में कारपेंटर नाम की एक औरत ने आनंदीबाई की मदद करने की तैयारी दिखाई और आनंदीबाई को  अपना धर्म न छोड़ते हुए भी 1883 इस साल में उनके उम्र के 19 साल में विमेंस मेडिकल कॉलेज ऑफ़ पेन्सिल्व्हानिया  इसमें प्रवेश मिल गया | उस दौरान वहां का तापमान और प्रवास की भागदौड़ इससे आनंदीबाई का स्वास्थ्य कुछ खराब हो  गया | लेकिन फिर भी उन्होंने अपना सपना पूरा कर लिया | 11 मार्च 1886 आनंदीबाई को MD की पदवी  बहाल की गई और  आनंदीबाई जोशी भारत की पहली महिला डॉक्टर बनी (ANANDIBAI JOSHI FIRST WOMEN DOCTOR IN INDIA) | उस वक्त इंग्लैंड की रानी ने भी उनका अभिनंदन किया था |

 स्वदेश आगमन

अमेरिका से वापस आते समय कोलकाता में आनंदी बाई ने एक भाषण दिया | देश के लिए महिला डॉक्टर की  क्या जरुरत है | यह उन्होंने बता दिया | उसी समय उन्होंने यह भी बता दिया कि उन्हें महिलाओं के लिए मेडिकल कॉलेज भी बनाना है | और हमारा धर्म हमारे धर्म की परंपरा इनकी भी रक्षा करने का उन्होंने वचन दिया | और आखिर तक वह ऐसा ही आचरण करती रही | वह हमेशा साड़ी पहनती थी और शेकहैण्ड  न करते हुए सबको नमस्कार करती थी |

लोकमान्य तिलकजी ने भी भारत की पहली महिला डॉक्टर इस नाते  डॉ आनंदीबाई जोशी का सन्मान किया | सन्मान के वक्त तिलकजीने उन्हें १०० रुपये दिए और उनका प्रसिद्ध वर्तमानपत्र केसरी में उनके बारेमे  लेखभी लिखा

 अंतकाल

आनंदीबाई जब अमेरिका गई थी तब वहां का तापमान और खाना-पीना यह  सहन नहीं कर सकी  इससे उनका स्वास्थ्य खराब हो गया और  इनको क्षयरोग हो गया | लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की  वह वापस आने के बाद महाराष्ट्र के अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल में उनकी नियुक्ति की गई | लेकिन दुर्भाग्य से वह ज्यादा काम नहीं कर सकी | और 26 फरवरी 1887 में  वह सब कुछ छोड़ कर चली गई |

आज भी डॉ आनंदीबाई जोशी इन की कहानी हम सबको बहुत ही प्रेरणा देने वाली है | इनकी कहानी से हमें यह सीखना चाहिए कि अगर कोई भी मुसीबत आती है तो भी हमें अपने कामपर पूरा ध्यान देकर और पूरी लगन के साथ अपना सपना हमें पूरा ही करना है | इसलिए आज हमने हमारे

आनंदीबाई जोशी भारत की पहली महिला डॉक्टर –ANANDIBAI JOSHI FIRST WOMEN DOCTOR IN INDIA   इस लेख में  डॉक्टर आनंदीबाई जोशी इनकी जीवनी देखी ऐसे ही हम प्रेरणादाई व्यक्तिमत्व के बारे में  आगे भी पढ़ते रहेंगे |