Indian Edison Shankar Bhise In Hindi
Scientist Shankar Bhise

 

Indian Edison Shankar Bhise In Hindi

नमस्कार दोस्तो ,

आज हम फिरसे आपके लिये एक नयी प्रेरणादायी कहानी लेके आए हें | ये कहानी एक शास्त्रज्ञ कि है जिनका नाम है शंकर आबाजी भिसे |

भारतवर्ष में अनादि कालसे भारत को महान बननेंकें लीयें बहुत लोगोनें अमूल्य योगदान दिया है | स्वातंत्रपूर्व काल में क्रांतीकारक, अधिवक्ता, उद्योगपति आदि सभिनेंभारत को एक उज्जल परम्परा दी है | और इनमें शास्त्रग्योंका योगदान भी अमुल्य था | इन शास्त्रग्योंमेसेंहि एक नाम है शंकर आबाजी भिसे |

भिसेजी इनका जन्म २९ अप्रिल १८६७ में मुम्बईमें हूआ | उनको बचपनसेहि विज्ञान मे बहुत रूची थी | चौदहवी उमरमेंहि उन्होने कोल्ड-गॅस को बनानेवाले उपकरन का निर्माण किया | बचपनमेंही उन्होंनें अमरिका मे जाकें एक बहुत बडा वैग्यानिक बनने का ध्येय रखा | जब कोई मनुष्य ध्येय रखके काम करता है वो हमेशा यशप्राप्ती करने के लिये आगे बढता है| आज ह्मारें सामने कई एंसें उदाहरण है| जिन्होने ध्येयको सामने रखके मार्गक्रमणा कि और यश प्राप्त किया | भिसेजीनेभी ध्येयको सामने रखा था और ओ हासिल करने के लिये अपना पहला कदम उठाया | संशोधन के उपर चर्चा करने के लिये भिसेजीने विज्ञान मंडल कि स्थापना कि | विज्ञान को घर घर में पाहुन्चाने हेतू उन्होने विविध कला प्रकाश नाम का मासिक शुरू किया | उस समय लंडनमें inventers review & scientific record नामका नियतकालिक प्रसिद्ध होता था | उस नियतकालिकमें एक स्पर्धा का विज्ञापन आया था | वो autometic वजनकाटेका drowing बनाने कि स्पर्धा थी | और उसमें भिसेजीने जो drawing भेजा था वो पहेले नम्बर पे आया था | ये देखकर सभी इंग्रज आश्चर्यचकित हो गये | इसके बाद भिसेजीका नाम सब जगह फेंल गया |

सातत्यसे विविध वैज्ञानिक खोज करनेवाले भिसेजीका सबसे महत्त्वपूर्ण शोध था casting type m/c उस समय के मशिन प्रतिमिनीट १५० अक्षर इतनी धिमी गतिसे कार्य करते थे | ये गति बंधने के लिये जगमे बहोत प्रयास हो रहे थे | लेकिन सभी अपयशी हुए थे | भिसेजी अकेले इस मशिन कि गति बढानेमें कामयाब हुए थे |लंडन कि एक कंपनीनें उनको आव्हान दिया | भिसेजीने वो आव्हान स्वीकारते हुए “ bhise type limited “ ये foundry का निर्माण किया और १९०८ मे प्रतिमिनीट १२०० अक्षर इस गतिसे autometic type machine बनाई  और सभी टीकाकारोके मुह बंद किये | उसके बाद इसी machine का इंहोनें पेटंट लिया |

मद्रासमें उद्योजकोंकि परिषद हुई उनमें भिसेजीको प्रमुख मेहमान के रूप में बुलाया tataने भि उनकों आर्थिक साहाय्य किया था | इस्मेसेहीं tata bhise invention syndicate कि स्थापना हुई | पाश्चात्य देशोसेभी जादा बेहतर और advance ऐसी रोटरी मल्टीपल type फास्टर इस machine का निर्माण किया | इसपर उन्होनें एक शोध प्रबंध लिखा और वो प्रबंध printers general में प्रसिध्द हुआ|

१९२० में भिसेजी अमरिका मे थे | universal type caster इस कम्पनी के request में उन्होनें ३ दिनमेंही एक मशिन का निर्मान किया | उधार उन्होनें Bhise  Ideal Type Casting Corporation नाम कि कंपनिका निर्माण किया | और उधर ऐसे माना जाता है कि भारतिय शास्त शास्त्रग्न्यसें अमरिका को ये भेट थी |

आज हम देखते है कि सोलर engineको जगभर में जादा उपयोगमें लाया जा रहा है और ये  एक आधुनिक घटना है ऐसे माना जाता हैं| लेकिन भिसेजीने १९१७ मे सौर energy पर एक मोटर बनायी थी | उन्होन्हे औषधो का भी निर्माण और खोज की | बेस्लीन और ऑटोमोडीन नाम के औषध बनाये | पेहेले विश्वयुद्ध मे इन दवाईयोंका जादा इस्तमाल किया गया |

भिसेजीने २०० से अधिक शोध लगाये उसमे रेल के automatic door, automatic वजन मापने का मशिन समूद्र के अंदर प्रकाश देने वाले दिये, automatic body मसाजर, आटा बनाने वाली चक्की, मिक्सर जैसे कई शोध लगाये और उसके पेटंट भी लिये | अमेरिका मे उनको एडिसन ऑफ ईंडीया ऐसे भी जाना जाता था लेकिन दुर्दैव दे भारत मे वो दुर्लक्षित हि रहे | खूद एडिसन ने भिसेजी कि भेट २३ डिसेम्बर १९३० मे ली |

ऐसे ये महान शास्त्रग्न्य कि मृत्यू ७ अप्रैल १९३५ मे न्यूयॉर्क मे हुई |